अथर्ववेद (कांड 20)
इन्द्र॒स्तुजो॑ ब॒र्हणा॒ आ वि॑वेश नृ॒वद्दधा॑नो॒ नर्या॑ पु॒रूणि॑ । अचे॑तय॒द्धिय॑ इ॒मा ज॑रि॒त्रे प्रेमं वर्ण॑मतिरच्छु॒क्रमा॑साम् ॥ (५)
जैसे युद्ध का इच्छुक वीर शत्रु सेना में प्रवेश करता है, उसी प्रकार इंद्र भी यजमानों के हित के लिए असुरों की विशाल सेनाओं में प्रवेश करते हैं तथा स्तुति करने वालों के लिए उषाओं का उदय करते हैं. इंद्र ही उषाओं के श्रेत रंग को बढ़ाते हैं. (५)
Just as the war-seeking hero enters the enemy army, so Indra also enters the vast armies of asuras for the benefit of the hosts and raises ushas for those who praise. It is Indra who increases the shret color of ushas. (5)