हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.115.1

कांड 20 → सूक्त 115 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 115
अ॒हमिद्धि पि॒तुष्परि॑ मे॒धामृ॒तस्य॑ ज॒ग्रभ॑ । अ॒हं सूर्य॑ इवाजनि ॥ (१)
मैं सूर्य के समान उत्पन्न हुआ हूं. मैं ने अपने पिता ब्रह्मा की बुद्धि प्राप्त की है. (१)
I was born like the sun. I have attained the wisdom of my father Brahma. (1)