हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.12.5

कांड 20 → सूक्त 12 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 12
ते त्वा॒ मदा॑ इन्द्र मादयन्तु शु॒ष्मिणं॑ तुवि॒राध॑सं जरि॒त्रे । एको॑ देव॒त्रा दय॑से॒ हि मर्ता॑न॒स्मिन्छू॑र॒ सव॑ने मादयस्व ॥ (५)
हे इंद्र! संस्कार किए गए सोम तुम्हें मदयुक्त करें. तुम बलशाली और स्तोताओं को अधिक धन देने वाले हो. देवों के मध्य अकेले तुम्हीं ऐसे हो जो मनुष्यों पर दया करते हो. हे इंद्र! इस यज्ञ में मनचाहा फल दे कर हमें प्रसन्न करो. (५)
O Indra! May the rites of soma make you drunk. You are powerful and give more money to the psalmists. Among the gods, you are the only one who has mercy on human beings. O Indra! Please us by giving you the desired results in this yajna. (5)