अथर्ववेद (कांड 20)
कया॑ नश्चि॒त्र आ भु॑वदू॒ती स॒दावृ॑धः॒ सखा॑ । कया॒ शचि॑ष्ठया वृ॒ता ॥ (१)
सदा वृद्धि करने वाले ये सखा किस रक्षा साधन से हमारी रक्षा करेंगे? उन की रक्षात्मक वृत्ति किस प्रकार पूरी होगी? (१)
With what means will these ever-growing friends protect us? How will their defensive instincts be fulfilled? (1)