हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.126.3

कांड 20 → सूक्त 126 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 126
किम॒यं त्वां॑ वृ॒षाक॑पिश्च॒कार॒ हरि॑तो मृ॒गः । यस्मा॑ इर॒स्यसीदु॒ न्वर्यो वा॑ पुष्टि॒मद्वसु॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (३)
हे इंद्र! इन वृषाकपि ने तुम्हें हरे रंग का मृग वयों बनाया है? तुम इन्हें पुष्टिकारक अन्न प्रदान करते हो. इस प्रकार इंद्र सब से बढ़ कर हैं. (३)
O Indra! Have these scorpions made you a green deer? You provide them with confirmatory food. Thus Indra is the most important. (3)