अथर्ववेद (कांड 20)
उष्ट्रा॒ यस्य॑ प्रवा॒हणो॑ व॒धूम॑न्तो द्वि॒र्दश॑ । व॒र्ष्मा रथ॑स्य॒ नि जि॑हीडते दि॒व ई॒षमा॑णा उप॒स्पृशः॑ ॥ (२)
जिस वधू वाले रथ को बारह ऊंट खींचने वाले हैं, वह आकाश का स्पर्श करता हुआ चलता है. (२)
The bride's chariot that is going to be pulled by twelve camels walks touching the sky. (2)