हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.128.12

कांड 20 → सूक्त 128 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 128
यदि॑न्द्रादो दाशरा॒ज्ञे मानु॑षं॒ वि गा॑हथाः । विरू॑पः॒ सर्व॑स्मा आसीत्स॒ह य॒क्षाय॒ कल्प॑ते ॥ (१२)
जिन्होंने पंख काट कर पर्वतों को स्थिर किया, जल का अवगाहन किया और वृत्र असुर का वध किया, उन इंद्र को नमस्कार है. (१२)
Salutations to Indra who cut off the wings and stabilized the mountains, invoked water and killed the great asura. (12)