हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.128.11

कांड 20 → सूक्त 128 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 128
वा॑वा॒ता च॒ महि॑षी स्व॒स्त्या च यु॒धिंग॒मः । श्वा॒शुर॑श्चाया॒मी तो॒ता कल्पे॑षु सं॒मिता॑ ॥ (११)
हे कामनाओं को पूरा करने वाले इंद्र! तुम सूर्य के रूप में अक्षु को झुकाते हो तथा रोहिणी को विस्तृत मुख वाला बना देते हो. तुम ने वृत्र असुर का सिर काटा था. (११)
O Indra who fulfills desires! You tilt the axis in the form of the sun and make Rohini with a wide face. You cut off the head of the vritra asura. (11)