हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.128.14

कांड 20 → सूक्त 128 → मंत्र 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 128
यः पर्व॑ता॒न्व्य॑दधा॒द्यो अ॒पो व्य॑गाहथाः । इन्द्रो॒ यो वृ॑त्र॒हान्म॒हं तस्मा॑दिन्द्र॒ नमो॑ऽस्तु ते ॥ (१४)
हे इंद्र! श्वेत अश्व तुम्हारे रथ की दाई ओर जुड़ते हैं. उन अश्चों पर सवारी करने वाले तुम देवों के द्वारा नमस्कार के योग्य तथा महिमाशाली हो. (१४)
O Indra! White horses join the right side of your chariot. You who ride on those ascetics are worthy of greeting and glorious by the gods. (14)