अथर्ववेद (कांड 20)
सुप्र॑पा॒णा च॑ वेश॒न्ता रे॒वान्त्सुप्रति॑दिश्ययः । सुय॑भ्या क॒न्या कल्या॒णी तो॒ता कल्पे॑षु सं॒मिता॑ ॥ (९)
सरोवरों का पीने योग्य जल से भरा होना, धनी होने पर दानी होना तथा सुंदर कन्या होने पर गृहस्थ धर्म के योग्य होना-एऐसा कल्प ग्रंथों के अनुसार है. (९)
Lakes being filled with potable water, being a donor when rich and being a beautiful girl, being eligible for household dharma - such kalpa is according to the texts. (9)