हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.128.10

कांड 20 → सूक्त 128 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 128
परि॑वृ॒क्ता च॒ महि॑षी स्व॒स्त्या च यु॒धिंग॒मः । अना॑शु॒रश्चाया॒मी तो॒ता कल्पे॑षु सं॒मिता॑ ॥ (१०)
हे इंद्र! तुम ने दाशराज युद्ध में मनुष्यों की खोज की थी. तुम सब के लिए रूपहीन बन गए थे. तुम उन के साथ यज्ञ के लिए कल्पित हुए. (१०)
O Indra! You discovered humans in the Dashraj war. You had become formless for everyone. You conceived for the sacrifice with them. (10)