अथर्ववेद (कांड 20)
अ॑रंग॒रो वा॑वदीति त्रे॒धा ब॒द्धो व॑र॒त्रया॑ । इरा॑मह॒ प्रशं॑स॒त्यनि॑रा॒मप॑ सेधति ॥ (१३)
चमड़े की रस्सी से बंधा हुआ रहट बारबार शब्द करता हुआ ऐसे स्थान को सींचता है, जहां फसले हैं. (१३)
Tied with a leather rope, Rahat repeatedly waters a place where there are crops. (13)