अथर्ववेद (कांड 20)
सुदे॑वस्त्वा म॒हान॑ग्नी॒र्बबा॑धते मह॒तः सा॑धु खो॒दन॑म् । कु॒सं पीव॒रो न॑वत् ॥ (१२)
महान अग्नि उत्पीड़न करने वाले हैं तथा बड़ेबड़ों को कुरेदते हैं. ये स्थूल और कृश सभी को नष्ट कर देते हैं. (१२)
Great agnis are oppressors and scrape the big ones. These gross and worms destroy everyone. (12)