अथर्ववेद (कांड 20)
म॑हान॒ग्नी म॑हान॒ग्नं धाव॑न्त॒मनु॑ धावति । इ॒मास्तद॑स्य॒ गा र॑क्ष॒ यभ॒ माम॑द्ध्यौद॒नम् ॥ (११)
महान अग्नि महाअग्नि के पीछे दौड़ते हैं. वे इस की इंद्रियों के रक्षक हो कर ओदन अर्थात् भात को खाते हैं. (११)
Run after the great agni maha agni. They become the protectors of its senses and eat odan i.e. rice. (11)