अथर्ववेद (कांड 20)
यद॑ल्पिका॒स्वल्पिका॒ कर्क॑न्धू॒केव॒ पद्य॑ते । वा॑सन्ति॒कमि॑व॒ तेज॑नं॒ यन्त्य॒वाता॑य॒ वित्प॑ति ॥ (३)
जो कर्कधू अर्थात् बेरी के समान घर को नष्ट करने वाले तथा अल्प से भी अल्प कण प्राप्त होते हैं, तब वासंतिक तेज आधान के निमित्त उस में गमन करते हैं. (३)
Those who destroy the house like a berry and get even the smallest particles, then they go to it for the sake of vasantik sharp transfusion. (3)