अथर्ववेद (कांड 20)
यदा॑ स्थू॒लेन॒ पस॑साणौ मु॒ष्का उपा॑वधीत् । विष्व॑ञ्चा व॒स्या वर्ध॑तः॒ सिक॑तास्वेव॒ गर्द॑भौ ॥ (२)
जब स्थूल पसस् के द्वारा मनुष्यों में अणु का प्रहार किया गया, तब धूल में लोटने वाले गधों के समान आच्छादनी अर्थात् छप्पर में मुश्क बढ़ते हैं. (२)
When the molecule is struck in humans by the gross rib, the clouds like donkeys rolling in the dust increase in the roof. (2)