अथर्ववेद (कांड 20)
प्र बो॑धयोषो अ॒श्विना॒ प्र दे॑वि सूनृते महि । प्र य॑ज्ञहोतरानु॒षक्प्र मदा॑य॒ श्रवो॑ बृ॒हत् ॥ (२)
हे स्तोताओ! तुम प्रातःकाल आश्चिनीकुमारों को जगाओ. हे सत्यरूप देवो! तुम स्तोताओं को प्रशंसनीय बनाओ. हे होता! तुम अश्विनीकुमारों के यश को सभी ओर फैलाओ. (२)
O stotao! Wake up the Ashtini Kumars in the morning. O God of truth! You make the psalms praiseworthy. He was! Spread the glory of Ashwini Kumars everywhere. (2)