हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.16.8

कांड 20 → सूक्त 16 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 16
अश्नापि॑नद्धं॒ मधु॒ पर्य॑पश्य॒न्मत्स्यं॒ न दी॒न उ॒दनि॑ क्षि॒यन्त॑म् । निष्टज्ज॑भार चम॒सं न वृ॒क्षाद्बृह॒स्पति॑र्विर॒वेणा॑ वि॒कृत्य॑ ॥ (८)
बृहस्पति देव ने पर्वत में छिपाई हुए गायों को उसी प्रकार देख लिया, जिस प्रकार जल कम हो जाने पर मनुष्य उस में रहने वाली मछलियों को देख लेते हैं. जिस प्रकार वृक्ष से चमस बाहर निकाला जाता है उसी प्रकार बृहस्पति देव ने गायों को छिपाने वाले असुर को मार कर गायों को बाहर निकाला था. (८)
Jupiter saw the cows hidden in the mountain in the same way, just as when the water decreases, humans see the fish living in it. Just as chamas is taken out of the tree, Jupiter Dev killed the asura who hid the cows and took the cows out. (8)