हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.47.10

कांड 20 → सूक्त 47 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 47
यु॒ञ्जन्ति॑ ब्र॒ध्नम॑रु॒षं चर॑न्तं॒ परि॑ त॒स्थुषः॑ । रोच॑न्ते रोच॒ना दि॒वि ॥ (१०)
हे इंद्र! तुम्हारा रथ सभी प्राणियों को लांघता हुआ चलता है. तुम्हारे रथ में जुड़े हुए हरे रंग अथवा हरि नाम वाले घोड़े आकाश में दमकते हैं. (१०)
O Indra! Your chariot runs crossing all beings. Horses with green color or hari name associated with your chariot shine in the sky. (10)