हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.47.11

कांड 20 → सूक्त 47 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 47
यु॒ञ्जन्त्य॑स्य॒ काम्या॒ हरी॒ विप॑क्षसा॒ रथे॑ । शोणा॑ धृ॒ष्णू नृ॒वाह॑सा ॥ (११)
इंद्र के सारथी रथ में घोड़ों को जोड़ते हैं. ये घोड़े रथ के दोनों ओर रहते हैं. ये घोड़े कामना करने योग्य हैं एवं इंद्र की यात्रा पूर्ण करने में समर्थ हैं. (११)
Indra's charioteers add horses to the chariot. These horses live on both sides of the chariot. These horses are worthy of desire and are capable of completing indra's journey. (11)