हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.47.12

कांड 20 → सूक्त 47 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 47
के॒तुं कृ॒ण्वन्न॑के॒तवे॒ पेशो॑ मर्या अपे॒शसे॑ । समु॒षद्भि॑रजायथाः ॥ (१२)
हे मनुष्यो! ये सूर्यरूपी इंद्र अज्ञानियों को ज्ञान देते हैं तथा अंधकार से ढके पदार्थो को प्रकाशित करते हैं. ये अपनी किरणों के साथ उदय हुए हैं. हे मनुष्यो! इन सूर्यरूपी इंद्र के दर्शन करो. (१२)
O men! These sun-like indras give knowledge to the ignorant and illuminate the things covered with darkness. They have risen with their rays. O men! See indra in the form of this sun. (12)