हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.47.16

कांड 20 → सूक्त 47 → मंत्र 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 47
त॒रणि॑र्वि॒श्वद॑र्शतो ज्योति॒ष्कृद॑सि सूर्य । विश्व॒मा भा॑सि रोचन ॥ (१६)
हे इंद्र! तुम संसार रूपी नाव के समान हो. तुम सब को देखने वाले हो, सब को ज्योति प्रदान करते हो और सब के प्रकाशक हो. (१६)
O Indra! You are like a boat in the world. You are the one who sees everyone, gives light to everyone and you are the illuminator of all. (16)