हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.47.15

कांड 20 → सूक्त 47 → मंत्र 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 47
अदृ॑श्रन्नस्य के॒तवो॒ वि र॒श्मयो॒ जनाँ॒ अनु॑ । भ्राज॑न्तो अ॒ग्नयो॑ यथा ॥ (१५)
सूर्य की किरणें ज्ञान देने वाली एवं अग्नि के समान दीप्त हैं. ये किरणें मनुष्यों का अनुकरण करती हैं. (१५)
The rays of the sun are as enlightening and as bright as agni. These rays simulate humans. (15)