हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.47.2

कांड 20 → सूक्त 47 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 47
इन्द्रः॒ स दाम॑ने कृ॒त ओजि॑ष्ठः॒ स मदे॑ हि॒तः । द्यु॒म्नी श्लो॒की स सो॒म्यः ॥ (२)
इंद्र प्रशंसनीय, सौम्य, तेजस्वी, बलवान तथा दूसरों को प्रसन्न करने वाले हैं. (२)
Indra is praiseworthy, gentle, brilliant, strong and pleasing to others. (2)