हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.57.8

कांड 20 → सूक्त 57 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 57
इन्द्रो॑ अ॒ङ्ग म॒हद्भ॒यम॒भी षदप॑ चुच्यवत् । स हि स्थि॒रो विच॑र्षणिः ॥ (८)
हे ऋत्विज्‌! इंद्र बड़े से बड़े भय को भी दूर कर देते हैं. उन सूर्य द्रष्टा अर्थात्‌ सब को देखने वाले इंद्र को कोई पराजित नहीं कर सकता. (८)
O Ritvij! Indra removes even the biggest fear. No one can defeat that sun seer, that is, Indra, who sees everyone. (8)