हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.57.7

कांड 20 → सूक्त 57 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 57
अ॑र्वा॒वतो॑ न॒ आ ग॒ह्यथो॑ शक्र परा॒वतः॑ । उ॑ लो॒को यस्ते॑ अद्रिव॒ इन्द्रे॒ह त॑त॒ आ ग॑हि ॥ (७)
हे इंद्र! तुम दूर या पास जहां कहीं हो, वहीं से हमारे समीप आओ. हे वज्रधारी इंद्र! तुम अपने उत्कृष्ट स्वर्गलोक से भी सोमरस पीने के लिए हमारे यज्ञ में आओ. (७)
O Indra! Come to us from wherever you are far or near. O Vajradhari Indra! You come to our yagna to drink someras even from your excellent paradise. (7)