हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.59.3

कांड 20 → सूक्त 59 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 59
उदिन्न्व॑स्य रिच्य॒तेंऽशो॒ धनं॒ न जि॒ग्युषः॑ । य इन्द्रो॒ हरि॑वा॒न्न द॑भन्ति॒ तं रि॑पो॒ दक्षं॑ दधाति सो॒मिनि॑ ॥ (३)
इंद्र का यज्ञ भाग जीते हुए धन के समान होता है. हरि नाम के अथवा हरे रंग के घोड़ों वाले इंद्र की हिंसा नहीं कर सकते. जो यजमान इंद्र को सोमरस देता है, इंद्र उस में बल को स्थापित करते हैं. (३)
Indra's yajna part is like the money won. Those named Hari or green horses cannot do violence to Indra. The host who gives Someras to Indra, Indra establishes the force in him. (3)