हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.69.11

कांड 20 → सूक्त 69 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 69
के॒तुं कृ॒ण्वन्न॑के॒तवे॒ पेशो॑ मर्या अपे॒शसे॑ । समु॒षद्भि॑रजायथाः ॥ (११)
हे मरणधर्मा मनुष्यो! सूर्य रूप इंद्र अज्ञानी को अन्न और अंधकार में छिपे हुए पदार्थ को रूप देते हैं. सूर्य रूप इंद्र अपनी किरणों से उदय हुए हैं. इन के दर्शन करो. (११)
O mortal human beings! The sun form Indra gives the form of food to the ignorant and the substance hidden in the darkness. The sun form Indra has risen from its rays. See these. (11)