हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.70.12

कांड 20 → सूक्त 70 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 70
स नो॑ वृषन्न॒मुं च॒रुं सत्रा॑दाव॒न्नपा॑ वृधि । अ॒स्मभ्य॒मप्र॑तिष्कुतः ॥ (१२)
हे इंद्र! यह सत्य है कि तुम धन देने वाले और फलों की वर्षा करने वाले हो. तुम किसी के हटाने से हटते नहीं हो. तुम हमारे इस चरु का भक्षण करो तथा हमारा सुख बढ़ाओ. (१२)
O Indra! It is true that you are the giver of wealth and the rainer of fruits. You don't shy away from removing anyone. You eat this charu of ours and increase our happiness. (12)