हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.70.2

कांड 20 → सूक्त 70 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 70
दे॑व॒यन्तो॒ यथा॑ म॒तिमच्छा॑ वि॒दद्व॑सुं॒ गिरः॑ । म॒हाम॑नूषत श्रु॒तम् ॥ (२)
हे स्तुतियो! हम स्तोता देवताओं की इच्छा करते हैं. हम इंद्र के सामने अपनी उत्तम बुद्धि को प्रस्तुत करेंगे. इस प्रकार उन महिमा वाले इंद्र की स्तुति की जाएगी. (२)
O praise! We desire the psalm gods. We will present our best intellect to Indra. In this way, Indra with those glory will be praised. (2)