हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.91.6

कांड 20 → सूक्त 91 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 91
इन्द्रो॑ व॒लं र॑क्षि॒तारं॒ दुघा॑नां क॒रेणे॑व॒ वि च॑कर्ता॒ रवे॑ण । स्वेदा॑ञ्जिभिरा॒शिर॑मि॒च्छमा॒नोऽरो॑दयत्प॒णिमा गा अ॑मुष्णात् ॥ (६)
इंद्र कामधेनुओं के पालक मेघ को छिन्नभिन्न कर देते हैं. उन्होंने दधि की इच्छा से गायों को चुराने वाले पणियों को व्यथित किया था. (६)
Indra shatters the spinach cloud of the kamdhenus. He had distressed the panis who stole cows with Dadhi's will. (6)