हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.96.5

कांड 20 → सूक्त 96 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 96
अ॑श्वा॒यन्तो॑ ग॒व्यन्तो॑ वा॒जय॑न्तो॒ हवा॑महे॒ त्वोप॑गन्त॒वा उ॑ । आ॒भूष॑न्तस्ते सुम॒तौ नवा॑यां व॒यमि॑न्द्र त्वा शु॒नं हु॑वेम ॥ (५)
हे इंद्र! अश्व, गौ और अन्न की कामना करने वाले हम तुम्हारा आश्रय पाने के लिए नवीन तथा उत्तम बुद्धि से संगत हो कर तुम्हें बुलाते हैं. (५)
O Indra! Those who desire horses, cows and food, we call upon you with new and good wisdom to seek your shelter. (5)