हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.96.7

कांड 20 → सूक्त 96 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 96
यदि॑ क्षि॒तायु॒र्यदि॑ वा॒ परे॑तो॒ यदि॑ मृ॒त्योर॑न्ति॒कं नीत ए॒व । तमा ह॑रामि॒ निरृ॑तेरु॒पस्था॒दस्पा॑र्शमेनं श॒तशा॑रदाय ॥ (७)
यह पुरुष दुर्गति को प्राप्त हो गया है और इस की आयु क्षीण हो गई है. यह मृत्यु के समीप पहुंच गया है, तब भी मैं इस को, निर्तऋति के अंक को खींचता हूं. मैं ने इस का स्पर्श इस हेतु किया है कि यह सौ वर्ष की आयु प्राप्त करे. (७)
This man has attained misery and his life has been reduced. It has come close to death, yet I draw it, the point of nirtiti. I have touched it so that it attains the age of a hundred years. (7)