अथर्ववेद (कांड 3)
वा॑नस्प॒त्या ग्रावा॑णो॒ घोष॑मक्रत ह॒विष्कृ॒ण्वन्तः॑ परिवत्स॒रीण॑म् । एका॑ष्टके सुप्र॒जसः॑ सु॒वीरा॑ व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम् ॥ (५)
हे एकाष्टक वृक्षों से बने ऊखल! मूसल आदि ने तथा पत्थरों ने संवत्सर में तैयार होने वाले जौ, धान आदि कूटतेपीटते हुए शब्द किया है. तुम्हारी कृपा से हम उत्तम पुत्र, पौत्रों शक्तिशाली सेवकों तथा धनों के स्वामी बनें. (५)
O o one-sided tree! Pestles etc. and stones have used words to crush barley, paddy, etc. prepared in Samvatsar. By Your grace, may we be the best sons, grandsons, powerful servants and masters of wealth. (5)