अथर्ववेद (कांड 3)
मु॒ञ्चामि॑ त्वा ह॒विषा॒ जीव॑नाय॒ कम॑ज्ञातय॒क्ष्मादु॒त रा॑जय॒क्ष्मात् । ग्राहि॑र्ज॒ग्राह॒ यद्ये॒तदे॑नं॒ तस्या॑ इन्द्राग्नी॒ प्र मु॑मुक्तमेनम् ॥ (१)
हे व्याधिग्रस्त मनुष्य! मैं हवि के अन्न द्वारा तुझे उस यक्ष्मा रोग से मुक्त करता हूं जो मेरे जाने बिना ही तेरे शरीर में प्रवेश कर गया है. राजा सोम को जिस राजयक्ष्मा ने गृहीत किया था, दीर्घ जीवन के लिए उस से भी मैं तुझे मुक्त करता हू. हे इंद्र और अग्नि! जिस पिशाचिनी ने इस बालक को पकड़ लिया है, आप दोनों उस से इस बालक को छुड़ाइए. (१)
O diseased man! I free you from the tuberculosis disease that has entered your body without my knowledge. I also free you from the king who accepted King Soma for a long life. O Indra and Agni! The vampire who has caught this child, you both rescue this child from him. (1)
अथर्ववेद (कांड 3)
यदि॑ क्षि॒तायु॒र्यदि॑ वा॒ परे॑तो॒ यदि॑ मृ॒त्योर॑न्ति॒कं नी॑त ए॒व । तमा ह॑रामि॒ निरृ॑तेरु॒पस्था॒दस्पा॑र्षमेनं श॒तशा॑रदाय ॥ (२)
यह व्याधिय्रस्त मनुष्य चाहे क्षीण आयु वाला हो गया हो अथवा इस लोक को छोड़ कर मृत्यु के देव यमराज के समीप चला गया हो अर्थात् चाहे उस की चिकित्सा असंभव हो-इस प्रकार के पुरुष को भी मैं मृत्यु के पास से वापस ला कर सौ वर्ष जीवित रहने के लिए शक्तिशाली बनाता हूं. (२)
Whether this sick man has become weak or has left this world and gone near Yamaraj, the god of death, that is, even if his healing is impossible , I also bring this kind of man back from death and make him powerful to live for a hundred years. (2)
अथर्ववेद (कांड 3)
स॑हस्रा॒क्षेण॑ श॒तवी॑र्येण श॒तायु॑षा ह॒विषाहा॑र्षमेनम् । इन्द्रो॒ यथै॑नं श॒रदो॒ नया॒त्यति॒ विश्व॑स्य दुरि॒तस्य॑ पा॒रम् ॥ (३)
जो हवि देखने की शक्ति प्रदान करती है तथा जिस से सुनने आदि की सैकड़ों शक्तियां प्राप्त होती हैं, उस हवि की शक्ति से मैं इस रोगी को मृत्यु से लौटा लाया हूं. उस हवि में सौ वर्ष जीने का फल प्रदान करने की शक्ति है. मैं हवि के द्वारा इंद्र को इस कारण प्रसन्न करता हूं कि ये इस पुरुष को सैकड़ों वर्ष तक की आयु का विनाश करने वाले पापों से छुटकारा दिलाएं. इस प्रकार यह सौ वर्ष तक जीवित रह सके. (३)
I have brought this patient back from death with the power of the divine, which gives me the power to see and from which hundreds of powers of hearing, etc. are obtained. That havi has the power to provide the fruits of living for a hundred years. I please Indra through Havi so that he can rid this man of the sins that destroy the age of hundreds of years. In this way, it can live for a hundred years. (3)
अथर्ववेद (कांड 3)
श॒तं जी॑व श॒रदो॒ वर्ध॑मानः श॒तं हे॑म॒न्तान्छ॒तमु॑ वस॒न्तान् । श॒तं त॒ इन्द्रो॑ अ॒ग्निः स॑वि॒ता बृह॒स्पतिः॑ श॒तायु॑षा ह॒विषाहा॑र्षमेनम् ॥ (४)
हे रोग से मुक्त पुरुष! तुम प्रतिदिन वृद्धि प्राप्त करते हुए सौ शरद ऋतुओं, सौ हेमंत ऋतुओं और सौ वसंत ऋतु.ओं तक जीवित रहो. इंद्र, अग्नि, सविता और बृहस्पति तुम्हें सौ वर्ष की आयु प्रदान करें. सैकड़ों वर्ष की आयु प्रदान करने वाले हवि के द्वारा मैं इसे मृत्यु के पास से लौटा लाया हूं. (४)
O man free of disease! You survive to a hundred autumns, hundred autumns and hundred springs while achieving growth daily. May Indra, Agni, Savita and Jupiter give you a hundred years of age. I have brought it back from near death by Havi, who gave me hundreds of years of age. (4)
अथर्ववेद (कांड 3)
प्र वि॑शतं प्राणापानावन॒ड्वाहा॑विव व्र॒जम् । व्य॒न्ये य॑न्तु मृ॒त्यवो॒ याना॒हुरित॑रान्छ॒तम् ॥ (५)
हे प्राण और अपान वायु! जिस प्रकार वृषभ अपनी पशुशाला में प्रवेश करता है, उसी प्रकार तुम इस क्षय रोग से ग्रस्त रोगी के शरीर में प्रवेश करो. इस राजयक्ष्मा के अतिरिक्त, जो मृत्यु के हेतु सैकड़ों रोग कहे गए हैं, वे भी इस रोगी से विमुख हो जाएं. (५)
O life and your air! Just as Taurus enters his cattle shed, so you enter the body of this tuberculosis patient. In addition to this coronation, hundreds of diseases that have been called for death should also be alienated from this patient. (5)
अथर्ववेद (कांड 3)
इ॒हैव स्तं॑ प्राणापानौ॒ माप॑ गातमि॒तो यु॒वम् । शरी॑रम॒स्याङ्गा॑नि ज॒रसे॑ वहतं॒ पुनः॑ ॥ (६)
हे प्राण और अपान वायु! तुम इस के शरीर में ही रहो, इस के शरीर से अकाल में ही मत निकलो. इस रोगी व्यक्ति के शरीर के हस्त, चरण आदि अंगों को तुम वृद्धावस्था तक मत त्यागो. (६)
O life and your air! You stay in his body, do not come out of his body in famine. Do not leave the hands, feet, etc. of this patient's body till old age. (6)
अथर्ववेद (कांड 3)
ज॒रायै॑ त्वा॒ परि॑ ददामि ज॒रायै॒ नि धु॑वामि त्वा । ज॒रा त्वा॑ भ॒द्रा ने॑ष्ट॒ व्य॒न्ये य॑न्तु मृ॒त्यवो॒ याना॒हुरित॑रान्छ॒तम् ॥ (७)
हे रोग मुक्त पुरुष! मैं तुझे वृद्धावस्था को देता हूं अर्थात् तुझे वृद्धावस्था तक जीवित रहने वाला बनाता हूं. मैं वृद्धावस्था तक रोगों से तेरी रक्षा करता हूं. वह वृद्धावस्था तुझे कल्याण प्राप्त कराए. (७)
O disease-free man! I give you old age, that is, I make you live to old age. I protect you from diseases till old age. May that old age benefit you. (7)
अथर्ववेद (कांड 3)
अ॒भि त्वा॑ जरि॒माहि॑त॒ गामु॒क्षण॑मिव॒ रज्ज्वा॑ । यस्त्वा॑ मृ॒त्युर॒भ्यध॑त्त॒ जाय॑मानं सुपा॒शया॑ । तं ते॑ स॒त्यस्य॒ हस्ता॑भ्या॒मुद॑मुञ्च॒द्बृह॒स्पतिः॑ ॥ (८)
हे रोग मुक्त पुरुष! जिस प्रकार गर्भाधान में समर्थ बैल को रस्सी से बांधा जाता है, उसी प्रकार मैं तुझे वृद्धावस्था से बांधता हूं. अर्थात् तुझे वृद्धावस्था तक जीवित रहने वाला बनाता हूं. तुझे जन्म लेते ही अकाल में मृत्यु ने अपने फंदे में कस लिया है. उस फंदे को बृहस्पति ब्रह्मा के हाथों के द्वारा कटवा दें. (८)
O disease-free man! Just as a bull capable of conception is tied with a rope, so I bind you to old age. That is, I make you live till old age. As soon as you are born, death has tightened its trap in famine. Cut that trap with the hands of Jupiter Brahma. (8)