अथर्ववेद (कांड 3)
पू॒र्णं ना॑रि॒ प्र भ॑र कु॒म्भमे॒तं घृ॒तस्य॒ धारा॑म॒मृते॑न॒ संभृ॑ताम् । इ॒मां पा॒तॄन॒मृते॑ना सम॑ङ्ग्धीष्टापू॒र्तम॒भि र॑क्षात्येनाम् ॥ (८)
हे स्त्री! तू अमृत के समान जल से युक्त शहद, घी आदि की धारा बहाती हुई जल से भरे घड़े को ले कर इस शाला में आ तथा इस घट को अमृत के समान जल से पूर्ण कर. इस शाला में किए जाने वाले श्रौत और स्मार्त कर्म चोरों, अग्नि आदि से हमारी रक्षा करें. (८)
O woman! You take a pitcher filled with water flowing a stream of honey, ghee etc. with water like nectar and come to this school and complete this ghat with water like nectar. Protect us from thieves, agni etc. (8)