हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 3.14.2

कांड 3 → सूक्त 14 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 3)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
सं वः॑ सृजत्वर्य॒मा सं पू॒षा सं बृह॒स्पतिः॑ । समिन्द्रो॒ यो ध॑नंज॒यो मयि॑ पुष्यत॒ यद्वसु॑ ॥ (२)
हे गायो! अर्यमा, उषा एवं धन जीतने वाले इंद्र तुम्हें उत्पन्न करें. इस के पश्चात तुम अपने दूध, घी आदि धन से मुझे पुष्ट करो. (२)
O sing! May Aryama, Usha and Indra, who wins wealth, produce you. After this, you strengthen me with your milk, ghee etc. (2)