अथर्ववेद (कांड 3)
शु॒नं वा॒हाः शु॒नं नरः॑ शु॒नं कृ॑षतु॒ लाङ्ग॑लम् । शु॒नं व॑र॒त्रा ब॑ध्यन्तां शु॒नमष्ट्रा॒मुदि॑ङ्गय ॥ (६)
बैल और किसान सुखपूर्वक हल जोतें. हल सुखपूर्वक धरती को फाड़े. रस्सियां सुखपूर्वक बांधी जाएं. हे शुनः अर्थात् वायु देव! तुम बैलों के हांकने के लिए प्रयुक्त होने वाले चाबुक को सुखपूर्वक प्रेरणा दो. (६)
Bulls and farmers plough happily. Plough the earth happily. Ropes should be tied happily. O Shunah i.e. Vayu Dev! You should gladly inspire the whip used to drive the bulls. (6)