हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 3.18.1

कांड 3 → सूक्त 18 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 3)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
इ॒मां ख॑ना॒म्योष॑धिं वी॒रुधां॒ बल॑वत्तमाम्। यया॑ स॒पत्नीं॒ बाध॑ते॒ यया॑ संवि॒न्दते॒ पति॑म् ॥ (१)
पाठा नाम की इस लता रूपी जड़ीबूटी को मैं खोदता हूं जो सभी जड़ीबूटियों से अधिक बलवान है. इस जड़ीबूटी के द्वारा सीत को बाधा पहुंचती है तथा इसे धारण करने वाली स्त्री पति को प्राप्त करती है. (१)
I dig up this vine-like herb called Patha, which is stronger. Seet is hindered by this herb and it is beneficial to wear it. A woman who wears patha finds her husband. (1)