अथर्ववेद (कांड 3)
पय॑स्वती॒रोष॑धयः॒ पय॑स्वन्माम॒कं वचः॑ । अथो॒ पय॑स्वतीना॒मा भ॑रे॒ऽहं स॑हस्र॒शः ॥ (१)
मेरे जौ, गेहूं आदि अन्न सारयुक्त हों तथा मेरा वचन भी सारयुक्त हो. मैं उन सार वाली फसलों से उत्पन्न धान्य को अनेक प्रकार से प्राप्त करूं. (१)
Let my barley, wheat, etc. be mixed with food and my word should also be abstract. I should get the grain produced from those essence crops in many ways. (1)