हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 3.28.2

कांड 3 → सूक्त 28 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 3)

अथर्ववेद: | सूक्त: 28
ए॒षा प॒शून्त्सं क्षि॑णाति क्र॒व्याद्भू॒त्वा व्यद्व॑री । उ॒तैनां॑ ब्र॒ह्मणे॑ दद्या॒त्तथा॑ स्यो॒ना शि॒वा स्या॑त् ॥ (२)
दो बच्चों को एक साथ जन्म देने वाली यह गाय मांस खाने वाली एवं दुःख देने वाली के समान यजमान के अन्य पशुओं का विनाश करती है. यह टोनेटोटके के समान संताप देने वाली है. इसे ब्राह्मण को दान कर देना चाहिए. ऐसा करने से यह अपनी संतान के द्वारा यजमान के लिए कल्याणकारिणी बन जाती है. (२)
This cow, which gives birth to two children together, destroys other animals of the host like a meat-eater and a sufferer. It is as painful as Tonetotke. It should be donated to a Brahmin. By doing this, it becomes a welfare for the host through its child. (2)