हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 4.16.8

कांड 4 → सूक्त 16 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 16
यः स॑मा॒म्यो॒ वरु॑णो॒ यो व्या॒म्यो॒ यः सं॑दे॒श्यो॒ वरु॑णो॒ यो वि॑दे॒श्यः । यो दै॒वो वरु॑णो॒ यश्च॒ मानु॑षः ॥ (८)
वरुण के सामान्य पाश समान रूप से एवं विशेष पाश विधि रूप से मनुष्यों को रोगी बनाते हैं. वरुण का जो पाश समान देश में तथा जो विदेश में बांधने वाला है, जो पाश देवों से संबंधित और जो मनुष्यों से संबंधित है, मैं उन सब पाशों से तुझे बांधता हूं. (८)
The normal loop of Varuna makes humans sick equally and in a special loop method. I bind you to all the loops of Varuna in the same country and which is going to bind abroad, which belongs to the gods and which belongs to human beings. (8)