अथर्ववेद (कांड 4)
क्षु॑धामा॒रं तृ॑ष्णामा॒रम॒गोता॑मनप॒त्यता॑म् । अपा॑मार्ग॒ त्वया॑ व॒यं सर्वं॒ तदप॑ मृज्महे ॥ (६)
हे अपामार्ग! हम तेरी सहायता से भूख की पीड़ा से पुरुष को मारने वाले एवं प्यास की अधिकता से पुरुष की मृत्यु करने वाले अभिचार का विनाश करते हैं. हम तेरी सहायता से गायों के अभाव को और संतानहीनता को भी समाप्त करते हैं. (६)
O your way! With Your help, we destroy the abhichar that kills a man with hunger and kills a man with an excess of thirst. With your help, we also end the lack of cows and childlessness. (6)