अथर्ववेद (कांड 4)
ईशा॑णां त्वा भेष॒जाना॒मुज्जे॑ष॒ आ र॑भामहे । च॒क्रे स॒हस्र॑वीर्यं॒ सर्व॑स्मा ओषधे त्वा ॥ (१)
हे सहदेवी! तू जड़ीबूटियों की स्वामिनी है. मैं शत्रु द्वारा किए गए अभिचार के दोष को शांत करने के लिए तेरा स्पर्श करता हूं. मैं अभिचार से उत्पन्न दोषों को दूर करने के लिए तुझे सामर्थ्य वाली बनाता हूं. (१)
O Sahadevi! You are the owner of herbs. I touch You to soothe the guilt of the conduct committed by the enemy. I empower you to remove the defects arising out of abhichar. (1)
अथर्ववेद (कांड 4)
स॑त्य॒जितं॑ शपथ॒याव॑नीं॒ सह॑मानां पुनःस॒राम् । सर्वाः॒ सम॒ह्व्योष॑धीरि॒तो नः॑ पारया॒दिति॑ ॥ (२)
वास्तव में अभिचार आदि दोषों को दूर करने वाली सत्यजित, दूसरे के आक्रोश को मिटाने वाली शपथ योगिनी, सब को पराजित करने वाली सहमाना, बारबार व्याधि का विनाश करने वाली पुनःसरा नामक जड़ीबूटी को अन्य जड़ीबूटियां अभिचार दोष का नाश करने के लिए प्राप्त होती हैं. (२)
In fact, Satyajit, who removes the defects of abhichar etc., the oath yogini who removes the anger of others, the sahamana who defeats everyone, the herb called Punasara, which destroys the disease again and again, gets other herbs to destroy the abhichar dosha. (2)
अथर्ववेद (कांड 4)
या श॒शाप॒ शप॑नेन॒ याघं मूर॑माद॒धे । या रस॑स्य॒ हर॑णाय जा॒तमा॑रे॒भे तो॒कम॑त्तु॒ सा ॥ (३)
जिस पिशाची ने आक्रोश में भर कर हमें शाप दिया है, जिस ने मूर्च्छा प्रदान करने वाला पाप हमारी ओर भेजा है और जो शरीर के रक्त आदि का हरण करने के लिए मेरे पुत्र आदि का आलिंगन करती है, वह मेरे ऊपर अभिचार करने वाले शत्रु के पुत्र को खा जाए. (३)
The person who has cursed us in anger, who has sent the sin of foolishness to us and who embraces my son etc. to take away the blood of the body, etc., he should eat the son of the enemy who curses me. (3)
अथर्ववेद (कांड 4)
यां ते॑ च॒क्रुरा॒मे पात्रे॒ यां च॒क्रुर्नी॑ललोहि॒ते । आ॒मे मां॒से कृ॒त्यां यां च॒क्रुस्तया॑ कृत्या॒कृतो॑ जहि ॥ (४)
हे कृत्या नाम की राक्षसी! अभिचार करने वालों ने तुझे मिट्टी के बिना पके पात्र में धुआं उगलती हुई नीली और लाल ज्वालाओं वाली अग्नियों में तथा बिना पके मांस में अभिमंत्रित किया है, तू उन का विनाश कर. (४)
O monster named Krita! Those who meditate have invited you in a vessel without clay in smoke-spewing blue and red flames and in uncooked flesh, you destroy them. (4)
अथर्ववेद (कांड 4)
दौष्व॑प्न्यं॒ दौर्जी॑वित्यं॒ रक्षो॑ अ॒भ्व॑मरा॒य्यः॑ । दु॒र्णाम्नीः॒ सर्वा॑ दु॒र्वाच॒स्ता अ॒स्मन्ना॑शयामसि ॥ (५)
हम अभिचार द्वारा सताए हुए इस पुरुष से बुरे स्वप्न संबंधी भय को, दुष्ट जीवन वाले लोगों संबंधी भय को, राक्षसों संबंधी भय को और महान अभिचार से उत्पन्न भय के कारण को नष्ट करते हैं. दरिद्रता के कारण पाप लक्ष्मियां, छेदिका, भेदिका आदि दुष्ट नामों वाली जो पिशाचियां हैं, मैं उन्हें भी इस के शरीर से दूर भगाता हूं. (५)
We destroy the fear of nightmares from this man persecuted by immorality, the fear of people with evil lives, the fear of demons, and the cause of fear arising from great conduct. Due to poverty, I also drive away the vampires with evil names like sin lakshmis, chhedika, bhedika, etc. from their body. (5)
अथर्ववेद (कांड 4)
क्षु॑धामा॒रं तृ॑ष्णामा॒रम॒गोता॑मनप॒त्यता॑म् । अपा॑मार्ग॒ त्वया॑ व॒यं सर्वं॒ तदप॑ मृज्महे ॥ (६)
हे अपामार्ग! हम तेरी सहायता से भूख की पीड़ा से पुरुष को मारने वाले एवं प्यास की अधिकता से पुरुष की मृत्यु करने वाले अभिचार का विनाश करते हैं. हम तेरी सहायता से गायों के अभाव को और संतानहीनता को भी समाप्त करते हैं. (६)
O your way! With Your help, we destroy the abhichar that kills a man with hunger and kills a man with an excess of thirst. With your help, we also end the lack of cows and childlessness. (6)
अथर्ववेद (कांड 4)
तृ॑ष्णामा॒रं क्षु॑धामा॒रं अथो॑ अक्षपराज॒यम् । अपा॑मार्ग॒ त्वया॑ व॒यं सर्वं॒ तदप॑ मृज्महे ॥ (७)
हे अपामार्ग! हम तेरी सहायता से प्यास की पीड़ा से पुरुष को मारने वाले, भूख की पीड़ा से पुरुष को मारने वाले अभिचार एवं जुए में पराजय को दूर भगाना चाहते हैं. (७)
O your way! With Your help, we want to remove the defeat in the practice and gambling that kills a man with the pain of thirst, who kills a man with the pain of hunger. (7)
अथर्ववेद (कांड 4)
अ॑पामा॒र्ग ओष॑धीनां॒ सर्वा॑सा॒मेक॒ इद्व॒शी । तेन॑ ते मृज्म॒ आस्थि॑त॒मथ॒ त्वम॑ग॒दश्च॑र ॥ (८)
हे अभिचार के दोष से गृहीत पुरुष! एकमात्र अपामार्ग ही सब जड़ीबूटियों को वश में करने वाला है. हम अपामार्ग की सहायता से तुझ में अभिचार द्वारा उत्पन्न रोग आदि को दूर करते हैं. इस के पश्चात तू रोग रहित हो कर विचरण कर. (८)
O man assumed by the guilt of the act! The only apamarga is going to control all herbs. We remove diseases etc. caused by witchcraft in you with the help of apamarg. After this, you become disease-free and roam around. (8)