अथर्ववेद (कांड 4)
अस॒द्भूम्याः॒ सम॑भव॒त्तद्यामे॑ति म॒हद्व्यचः॑ । तद्वै ततो॑ विधूपा॒यत्प्र॒त्यक्क॒र्तार॑मृच्छतु ॥ (६)
हे ओषधि! तेरे पास से निकल कर महान् तेज जिस भूमि तक जाता है, वहां गाड़ी गई कृत्या किसी को हानि नहीं पहुंचा सकती. तू अपने स्थान से निकल कर विशेष रूप से प्रज्वलित होती हुई कृत्या के निर्माण करने वाले को पीड़ा पहुंचा. (६)
O medicine! The act of driving from you to the land where the great speed goes cannot harm anyone. You came out of your place and hurt the creator of the specially ignited act. (6)