हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 4.19.7

कांड 4 → सूक्त 19 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 19
प्र॒त्यङ्हि सं॑ब॒भूवि॑थ प्रती॒चीन॑फल॒स्त्वम् । सर्वा॒न्मच्छ॒पथाँ अधि॒ वरी॑यो यावया व॒धम् ॥ (७)
हे आत्माभिमुख फल देने वाले अपामार्ग! तू शत्रु के विनाश को मुझ से दूर कर के उसी के पास भेज दे. शत्रु द्वारा मेरे प्रति किए गए हिंसा साधनों और कृत्या को तू मुझ से दूर कर. (७)
O self-facing path of fruit! You take away the destruction of the enemy from me and send it to him. Remove from me the means and acts of violence committed by the enemy against me. (7)