हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 4.19.8

कांड 4 → सूक्त 19 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 19
श॒तेन॑ मा॒ परि॑ पाहि स॒हस्रे॑णा॒भि र॑क्ष मा । इन्द्र॑स्ते वीरुधां पत उ॒ग्र ओ॒ज्मान॒मा द॑धत् ॥ (८)
हे सहदेवी अथवा अपामार्ग! तू सैकड़ों और हजारों उपायों से मेरी रक्षा कर और मुझे कृत्या के दोष से छुड़ा. हे लतारूपी जड़ीबूटियों की स्वामिनी! महा तेजस्वी इंद्र तेरा तेज मुझ में स्थापित करें. (८)
O sahadevi or the way! Protect me by hundreds and thousands of measures and deliver me from the guilt of actions. O swami of herbs! May Maha Tejasvi Indra establish your brilliance in me. (8)