अथर्ववेद (कांड 4)
स नः॒ सिन्धु॑मिव ना॒वाति॑ पर्षा स्व॒स्तये॑ । अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम् ॥ (८)
हे उक्त गुणों वाले अग्नि! जिस प्रकार नाव के द्वारा सागर को पार करते हैं, उसी प्रकार हमारे शत्रुओं को हम से दूर करो एवं हमारे पापों को नष्ट करो. (८)
O agni with the above qualities! Just as we cross the ocean by boat, so remove our enemies from us and destroy our sins. (8)