हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 4.9.1

कांड 4 → सूक्त 9 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 9
एहि॑ जी॒वं त्राय॑माणं॒ पर्व॑तस्या॒स्यक्ष्य॑म् । विश्वे॑भिर्दे॒वैर्द॒त्तं प॑रि॒धिर्जीव॑नाय॒ कम् ॥ (१)
हे अंजन मणि! तू त्रिककुद नामक पर्वत से जीवित प्राणियों की रक्षा के लिए आ. तू त्रिककुद पर्वत की आंख है. इंद्र आदि सभी देवों ने रोग रहित रहने के लिए तुझे चहारदीवारी के रूप में प्रदान किया है. (१)
O Anjan Mani! You come to protect living beings from a mountain called Trikkud. You are the eye of Mount Trikakud. All the gods like Indra etc. have provided you in the form of a boundary wall to remain disease-free. (1)