अथर्ववेद (कांड 4)
प॑रि॒पाणं॒ पुरु॑षाणां परि॒पाणं॒ गवा॑मसि । अश्वा॑ना॒मर्व॑तां परि॒पाणा॑य तस्थिषे ॥ (२)
हे त्रिककुद पर्वत पर उत्पन्न अंजन मणि! तू पुरुषों, गायों, घोड़ों और घोड़ियों की रक्षा के लिए स्थित है. (२)
O Anjan Mani born on Mount Trikkud! You are located to protect men, cows, horses and mares. (2)